• Wednesday, December 13, 2017

रंगभेद की बीमारी मेरी नहीं, समाज की है - नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी 

Bollywood Aug 24, 2017       748
रंगभेद की बीमारी मेरी नहीं, समाज की है - नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी 

द करंट स्टोरी, भोपाल। एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी ​अगली फिल्म 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' के प्रमोशन के सिलसिले में बुधवार को भोपाल पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने व फिल्म के अन्य किरदारों से मीडिया से चर्चा की। 

अपने किरदार के बारे में बताते हुए नवाज ने कहा कि फिल्म में वह एक गैंगस्टर का किरदार निभा रहे हैं, जो सारा काम सिर्फ पैसे के बल पर करता है और लड़कियों को ताड़ने के पैसे भी देता है। बंदूक चलाने की ट्रेनिंग पर नवाज ने आगे कहा कि उन्होंने इसकी पहले कोई ट्रेनिंग नहीं ली है और न ही कभी शौक रहा है।  

नवाज़ ने आगे कहा कि 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' फिल्म एक रोमांटिक फिल्म है पर इसका अंदाज़ अलग है, अभी तक जो रोमांटिक फ़िल्में बनती थीं उनमें फेक रोमांस होता है, जो कि मुझे पसंद नहीं आती। मुझे वो खेतों में दोड़कर गाना, गाना भी अच्छा नहीं लगता। मैं वो लव स्टोरी करना चाहता हूँ जो करैक्टर्स हमारे आस पास मौजूद हों उनकी प्रेम कहानी पर आधारित हों। 

 फिल्म 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' की एक्ट्रेस बिदिता बाग और श्रद्धा दास समेत फिल्म के प्रोड्यूसर अश्मित भी भोपाल पहुंचे थे।

फिल्म की एक्ट्रेस बिदिता बेग ने शूटिंग के दौरान आई कठिनाइयों के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि बाराबंकी में जब शूट का दूसरा दिन था तब मैं और नवाज़ एक दूसरे को जान भी नहीं पाए थे। डायरेक्टर ने हमे इंटिमेट सीन के बारे में बताया जो मेरे लिए सरप्राइज था और फिर 48 डिग्री टेंप्रेचर में इंटीमेट सीन दिए। नवाज़ जी ने मेरा काफी साथ दिया, उस दिन बाहर इतनी गर्मी तो थी ही और सीन करने में हमारी अंदर की गर्मी भी बाहर आ गई थी। 

फिल्म की दूसरी अभिनेत्री श्रद्धा दास ने कहा कि उन्होंने टॉलीवुड अभी छोड़ा नहीं हैं। कन्नड़, मलयालम, तेलगु और बंगाली भाषाओँ में फिल्मे की हैं और आगे भी करती रहूंगी, पर हर केरेक्टर की अपनी पहचान होती है। किसी दूसरी भाषा की फिल्म की तुलना टॉलीवुड से करना जायज़ नहीं होगा। 

नवाज़ुद्दीन ने ब्यूटी क्रीम को लेकर एक किस्सा सुनाया 'जब मैं छोटा था तो हमारे इलाके में नकली क्रीम मिलती थी जिसे लगाकर मैं लड़कियों के सामने जाता था तो सोचता था वो एक रूपए वाली ब्यूटी क्रीम से थोड़ा गोरा हो जाऊं पर मैं पकड़ा जाता था और हंसी का पात्र बन जाता था, फिर मैं सोचता था की मैं अपने रंग पर कॉंफिडेंट क्यों नहीं हूँ तब मुझे समझ आया कि ये मेरी नहीं समाज की प्रॉब्लम है। शादी के लिए विज्ञापन भी देखिये तो गोरा लड़का गोरी लड़की ही चाहिए होती है हर कोई गोरे पर मरे जा रहे हैं। रंग को लेकर मैंने सोचना छोड़ दिया और मेहनत करता रहा। अंत में आप कैसे दिखते हैं वो काम नहीं आता आपकी मेहनत और लगन ही आपको मुकाम तक ले जाती है। पर जिनके दिमाग में ये बात है वो बहुत गलत है।" 

ट्रिपल तलाक के मुद्दे और किसानों की हत्या पर भी नवाज़ ने कहा "सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत है और रही बात किसानों की आत्महत्या तो इसे गलत मानता हूँ ऐसा नहीं होना चाहिए हालाँकि बहुत सारे किसान कर्ज से डूबे हुए है और समय-समय पर सरकार नई स्कीम लाती रहती है उनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 

नवाज़ुद्दीन ने भोपाल शहर की भी तारीफ़ की और बताया की "पिपली लाइव" की शूटिंग के वक़्त यहीं रुके थे। उन्होंने आगे कहा कि भोपाल प्राकृतिक तौर पर खूबसूरत शहर है और आशा करता हूं कि ऐसा ही रहेगा हमेशा। 

"बाबूमोशाय बंदूकबाज" फिल्म 25 अगस्त को रिलीज़ होगी।

 

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