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आंसू पोछती चौपाल, तो रुलाती जनसुनवाई

आलेख Sep 30, 2017       274
आंसू पोछती चौपाल, तो रुलाती जनसुनवाई

प्रवेश गौतम, भोपाल। लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार व प्रशासन अपने स्तर पर कई प्रयास करते रहते हैं। इन्हीं में से एक है जनसुनवाई, जो कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रति मंगलवार को आयोजित की जाती है। प्राय: जनसुनवाई में लोगों की समस्या का निराकरण कम ही हो पाता, जबकि दूर दराज से आए लोग परेशान जरुर होते हैं। कई बार तो बेबस से आमजन, की आंखों में आंसू तक आ जाते हैं। 

सरकार ने लोगों को सहूलियत देने के लिए हर विभाग में जनसुनवाई का प्रावधान किया है, जिसमें कि भोपाल नगर निगम भी शा​मिल है। नगर निगम में होने वाली जनसुनवाई में ज्यादातर समय आयुक्त गैर मौजूद ही र​हते हैं। वहीं लोगों को छोटी से छोटी समस्या के लिए घंटों इंतजार करने के बाद भी निराकरण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता और न ही कोई समय सीमा दी जाती है। 

भोपाल नगर निगम के महापौर आलोक शर्मा ने आमजन की शिकायतों और समस्याओं के निवारण के लिए 'भोपाल की चौपाल' की शुरुआत की। इस चौपाल में लोगों की समस्याओं का निराकरण एक निश्चित समय में पूरा करने का काम भी शुरु किया गया। 

इसी चौपाल में, पिछले सोमवार यानि 25 सितंबर 2017 को एक बुजुर्ग महिला अपनी समस्या को लेकर चौपाल में रोते हुए आई थी। उक्त महिला की समस्या को लेकर महापौर ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के आदेश दिए। अधिकारियों द्वारा महिला की समस्या के निराकरण के लिए जब सकारात्मक जवाब मिला तो उक्त बुजुर्ग महिला के चेहरे पर खुशी थी और वह अपने आंसू पोछते हुए वहां से चली गई। 

ऐसे ही कई उदाहरण हैं, जिनमें चौपाल के दौरान त्वरित कार्रवाई होने से आमजन काफी हद तक संतुष्ट हो रहे हैं, जिनमें स्कूल व कॉलेज के छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि कुछ समस्याओं का निराकरण त्वरित नहीं होता पर उनके लिए भी समय सीमा निर्धारित की जाती है। 

आमूमन, सफाई, लीकेज, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण जैसी शिकायतों का निराकरण उसी दिन हो जाता है। तो वहीं बड़ी समस्याओं जैसे रोड निर्माण, पार्क निर्माण, शौचालय निर्माण आदि की ​शिकायतों के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए जाते हैं। 

'भोपाल की चौपाल' में लोगों के आंसू पोछने का काम हो रहा है तो वहीं जनसुनवाई में दिनभर परेशान होने के बाद लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। 

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