Amarnath Yatra अमरनाथ यात्रा: कैसे जाएं और क्या रखें सावधानी

Published By :  Pravesh Gautam

Jun 27,2024 | 07:46:pm IST |  11383

प्रवेश गौतम, ( करंट स्टोरी, भोपाल)। कहते हैं अमरनाथ यात्रा उन्हीं की होती है इनके भगवान भोलेनाथ बुलाते हैं। इस यात्रा पर अगर आप जा रहे हैं तो यह लेख आपके लिए है। 

अमरनाथ यात्रा भारत में हिन्दू तीर्थयात्रा के रूप में मानी जाती है, जिसमें श्रद्धालुओं को अमरनाथ गुफा जाने की यात्रा किया जाता है। यह गुफा जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के पास होती है और यात्रा के दौरान श्रद्धालु शिवलिंग को दर्शन करने जाते हैं। यह यात्रा वार्षिक रूप से श्रावण माह (जुलाई-अगस्त) में आयोजित की जाती है। इस यात्रा में अगर आप का रहे हैं तो यह लेख आपके लिए है।

अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन हेतु दो रास्ते हैं। पहला पहलगाम से और दूसरा बालटाल के रास्ते।

पहलगाम के रास्ते:
पहलगाम के रास्ते यदि पैदल जाते हैं तो दो से तीन दिन तक लग जाते हैं। यहां पैदल के अलावा घोड़े, पिट्ठू आदि की सुविधा भी मिलती है। हेलीकॉप्टर की सेवा भी यहां से संचालित होती है। 

अमरनाथ यात्रा पहलगाम के बेस कैंप से शुरू होती है और चंदनवारी तक लगभग 16 किलोमीटर की दूरी कवर करती है। चंदनवारी से शेषनाग तक 13 किलोमीटर का ट्रेक होता है, फिर शेषनाग से पंचतरणी तक 4.6 किलोमीटर की यात्रा की जाती है। वहां से लगभग 2 किलोमीटर की पैदल यात्रा से श्रद्धालु अमरनाथ गुफा तक पहुँचते हैं, जो भगवान शिव के पवित्र ध्यान स्थान के रूप में जाना जाता है। दर्शन के पश्चात आप बालटाल के लिए नीचे उतर सकते हैं। यहां खड़ी चढ़ाई होने के करना दूरी कम हो जाती है। पर यहां का रास्ता संकरा और खतरनाक है। इसलिए संभल कर उतरें।

बालटाल के रास्ते
कहने को तो यहां से पवित्र गुफा की दूरी लगभग 10 किलोमीटर ही है। पर खड़ी चढ़ाई होने के करना यह रास्ता चढ़ने में कई समस्याएं आती हैं। यहां से यात्रा सुबह 4 बजे प्रारंभ होती है। 9 बजे के बाद यहां से किसी को चढ़ने नही दिया जाता। इस रास्ते में यात्री पैदल या फिर घोड़े (टट्टू) का उपयोग करते हैं। पैदल चढ़ने में लगभग 8 से 10 घंटे लग जाते हैं, जबकि घोड़े से यही रास्ता लगभग 5 से 6 घंटे में चढ़ा जा सकता है। इस रास्ते से यदि घोड़े (टट्टू) का उपयोग किया जाए तो एक ही दिन में बाबा बर्फानी के दर्शन करके वापस बालटाल बेस कैंप लौटा जा सकता है। यदि सुबह 6 बजे चढ़ना शुरू करते हैं तो 12 बजे के लगभग गुफा के पहले पहुंच जाते हैं। यहां से लगभग 1.5 किलोमीटर पैदल चलने के बाद पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर, 3 बजे उतरना शुरू करते हैं तो लगभग 8 बजे तक बालटाल बेस कैंप पहुंच जाएंगे। सुरक्षा कारणों से यहां से रात में कोई यात्री बाहर नही का सकता। रात बालटाल में ही बिता कर सुबह 5 बजे श्रीनगर के लिए वापस जाया जा सकता है। 

यात्रा के दौरान इन चीजों को रखें साथ:
पहाड़ों और मानसून के कारण यहां कभी भी बारिश हो जाती है। इसलिए अपने साथ एक रेनकोट जरूर रखें। कपड़े वो पहनें को जल्दी सूख जाए जैसे पॉलिस्टर, आदि। वहीं जूते वो पहनें जो नरम होने के साथ साथ मजबूत हों और फिसला भरे रास्ते में न  फिसले। ऊपर लगभग 13 हजार फीट की ऊंचाई होती है। इसलिए गरम कपड़े विशेषकर विंड शीटर अवश्य रखें। टोपी, मफलर, दस्ताने ले जाना बिलकुल न भूलें। मोबाइल के लिए पावरबैंक जरूर रखें। ऊपर जाने के लिए छोटा कैरी बैग में यह सब सामान रखें। बैग में अनावश्यक समान बिल्कुल न रखें। इससे आपको थकान कम होगी। एक बात का विशेष ध्यान रखें, ज्यादा ऊंचाई में ऑक्सीजन की कमी होती है। ऐसे में यदि सर चकराए तो कुछ मीठा (चॉकलेट) जरूर खा लें।इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। हालांकि ऊपर हमारी सेना द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था रहती है। 

दर्शन के पहले करें यह काम
गुफा के पास पहुंचने पर, क्लॉक रूम देख लें। यहां सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मोबाइल, चार्जर, पावर बैंक, स्मार्ट घड़ी आदि को जमा करा दें। फिर लाइन में लगें। वरना आधी दूर जाने के बाद सुरक्षा जांच में आपको बाहर कर दिया जाएगा। जूते ऊपर गुफा के पहले जूता स्टैंड में उतारें। इस दौरान रेनकोट साथ में ही रखें।

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