नियमों को ताक पर रख सालों से एक ही जगह डटे रेलवे कर्मचारी

Published By :  Pravesh Gautam

Jul 20,2022 | 01:49:26 pm IST |  10824

बड़े साहब की द​रियादिली या निहित स्वार्थ!

प्रवेश गौतम, भोपाल। भारतीय रेलवे  (Indian Railway) में नियमों का तो अंबार है, लेकिन इनको मानने वालों की भारी कमी है। कहने को तो भ्रष्टाचार (Corruption in Railways) पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance Policy) की नीति की बात करते हैं लेकिन कुछ अधिकारियों (Corrupt Railway Officers) के लिए मानो भ्रष्टाचार तरक्की (Promotion in Railway) की सीढ़ी है। यकीन न हो तो भोपाल रेल मंडल (Bhopal Rail Division) की टीआरओ शाखा (TRO Branch) में सालों से पदस्थ दर्जनों कर्मचारियों (Railway employees) की सूची देख लीजिए।

किसी भी शाखा में कार्यालय अधीक्षक (Office Superintendant)  का पद संवेदनशील (Sensitive) की श्रेणी में आता है। लेकिन इस संवेदनशील पद पर भी सालों तक बने रहने का मूल मंत्र कुछ विशेष कार्यालय अधीक्षकों व अन्य कर्मचारियों से सीखा जा सकता है। वहीं टीआरओ के शाखा अधिकारी संजय तिवारी पूरे मामले में जानकार बनकर भी अनजान बने हुए हैं। 

दरअसल, भोपाल रेल मंडल की टीआरओ शाखा में 10 से ज्यादा ऐसे कार्यालय अधीक्षक व अन्य कर्मचारी हैं जो 10 साल से ज्यादा वक्त से एक ही कुर्सी तोड़ रहे हैं। सालों से एक ही पद पर विराजमान यह कर्मचारी अपने काम के हर उस हुनर के माहिर हो चुके हैं जिससे शाखा अधिकारी को खुश किया जा सकता है। शायद यही कारण है कि मंडल के शाखा अधिकारी संजय तिवारी भी महाभारत के धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। 

सालों से टीआरओ शाखा में पदस्थ:
1. अखलाक अहमद — मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वर्ष 1992 से पदस्थ
2. ईशरत किदवई — मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वर्ष 1992 से पदस्थ
3. कदीरूद्दीन — मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वर्ष 2003 से पदस्थ
4. परवेज सज्जाद — एएएफ मुख्यालय, वर्ष 1992 से पदस्थ
5. निखहत कुरैशी — मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वर्ष 1995 से पदस्थ
6. फरहत उन्नीसा — मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वर्ष 1995 से पदस्थ
7. मो. सलीम — टीआरओ में 1996 से पदस्थ

इनका तबादला आदेश जारी फिर भी नहीं हुए रिलीव:
1. असमत पाशा — इनका तबादला हो गया है पर बड़े साहब ने रिलीव न​हीं किया

Tags :