Bhopal DRM डीआरएम कार्यालय का हरिराम नाई!

Published By :  Pravesh Gautam

Jul 01,2024 | 01:56:pm IST |  1819

प्रवेश गौतम ( करंट स्टोरी, भोपाल)। डीआरएम यानी मंडल रेल प्रबंधक का पद बेहद महत्पूर्ण होता है। इस पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदारी सबसे ज्यादा होती हैं। ऐसे में डीआरएम यदि अपने आसपास के लोगों यानी मातहत कर्मचारी और अधिकारियों को संभाल न पाएं और आंख बंद करके काम करें तो क्या होगा, सोचिए जरा। मंडल का बेड़ा फर्क होना स्वाभाविक है। ऐसे ही माहौल में अवतार लेते हैं हरिराम नाई (शोले फिल्म का एक किरदार)। जी हां मंडल के कर्ता धर्ता के कार्यालय में मौजूद है एक हरिराम नाई। 

बात कर लेते हैं भोपाल रेल मंडल के डीआरएम कार्यालय की। सूत्रों ने बताया की यहां मौजूद हैं एक हरिराम नाई, जिसे कहा जा सकता है खबरी। और यह काम करता है मंडल के विशेष ब्रांच अधिकारियों के इशारे पर। मतलब, डीआरएम साहब क्या कर रहे हैं, कौन सी फाइल देख रहे हैं, कब औचक निरीक्षण करेंगे, कब ऊपर से डांट पड़ी और कौन कौन अधिकारी उनसे मिल रहे हैं, आदि, सभी खबरें समय से इधर की उधर करते हैं। 

इस हरिराम नाई की, जेब गरम करने वाले अधिकारियों से इतनी नजदीकी है की शाम ढलते ही साहब से अपना मेहनताना लेकर निकल जाते हैं। और फिर जमती है महफिल। खैर, अब आपको बताते हैं की इसका क्या फायदा हुआ। 

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सूत्र बताते हैं की, 27 जून को डीआरएम महोदय लाव लश्कर लेकर निकले थे निरीक्षण पर। यानी फुटप्लेट पर। उसके बाद स्टेशन का निरीक्षण। कहने को तो इसका उद्देश्य था सिस्टम की खामी या यूं कहें कमी देखना और उसको सुधारने के निर्देश देना। पर इस निरीक्षण से पहले ही हरिराम नाई ने पूरी रूपरेखा संबंधित ब्रांच अधिकारी को बता दी। फिर क्या था, सभी स्टेशन और रास्ते में ब्रांच अधिकारी ने व्यवस्था दुरुस्त कर ली, जो अमूमन बेहद खराब ही रहती है। और तो और डीआरएम साहब को भी हरिराम नाई ने ऐसा भरा, की वह इधर उधर कुछ देख ही नहीं पाए।  बस फिर क्या था। हो गई सबकी बल्ले बल्ले। हो गया निरीक्षण। एक दो छुटपुट बदलाव सुधार के निर्देश दिए और हो गया काम खत्म। सब खुशी खुशी लौट आए। न किसी को मुंह लटका और न किसी का सीआर बिगड़ा। 

लौटने के बाद जब निरीक्षण रिपोर्ट देखी, तो हरिराम नाई को संबंधित ब्रांच अधिकारी ने तोहफे से नवाजा। और इस ब्रांच अधिकारी के मित्र अन्य ब्रांच अधिकारी ने इस ब्रांच अधिकारी को एहसान लौटाने का आश्वासन दे दिया।

अब सोचिए जरा, बारिश के मौसम में हुई फुटप्लेट निरीक्षण की रिपोर्ट सबके मुफीद बन जाए तो संदेह होना तो लाजमी है। 

पर सब के सब खुश है। वैसे डीआरएम साहब बड़े शांत प्रिय व्यक्ति है। सूत्र बताते हैं की वह किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते। जैसे यदि कमियां निकालनी शुरू की तो उसको दुरुस्त करवाने की जिम्मेदारी भी उनपर आ जायेगी। और हर रिव्यू में एक सर दर्द बना रहेगा। इसलिए ज्यादा तांक झांक नही करते। बस सब शांति से चलता रहे और कार्यकाल पूरा हो जाए। 

आप जानते हैं कौन है हरिराम नाई? वैसे सूत्र यह भी बताते हैं की जहां डीआरएम साहब को कोई कमी नही मिली वहां कई कमियां है।

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